Jaipur Se Bangalore Tak Choda Chodi

Kamukta Jaipur Se Bangalore Tak Choda Chodi
जयपुर से बेंगलोर तक चोदा चोदी

प्रेषक : राहुल धवन

हैल्लो फ्रेंड्स मेरा नाम राहुल धवन है और में 24 साल का हूँ.. में दिखने में स्लिम बॉडी और बहुत सुंदर हूँ.. मेरा रंग सावंला है और मेरी हाईट 5.8 इंच है और में राजस्थान का रहने वाला हूँ। में कामुकता डॉट कॉम का आप ही की तरह एक रेग्युलर रीडर हूँ और में इस साईट पर कई सेक्सी कहानियाँ पढ़ चुका हूँ और मुझे इस पर कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है और में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को मेरी ये कहानी बहुत पसंद आएगी।

दोस्तों ये बात तब की है जब मैंने अपनी इंजिनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी और मुझे एक नौकरी के लिए बेंगलोर से इंटरव्यू का कॉल आया था। तभी मैंने तत्काल में टिकिट लिया और में वहाँ पर जाने की तैयारी करने लगा। में उस समय जयपुर में था और जयपुर से बेंगलोर पहुंचने में लगभग 40 घंटे लगते है। फिर अगले दिन शाम 7:40 की मेरी ट्रेन थी और में समय पर स्टेशन पहुंच गया और क्योंकि ट्रेन वहीं से शुरू होती है तो में आराम से ट्रेन में जाकर बैठ गया। मेरी सीट साईड में नीचे की थी और फिर मेरे बैठने के थोड़ी देर में ट्रेन चल पड़ी.. मैंने भी अपना समान ठीक से रख लिया और बैठ गया।

फिर इतने में ट्रेन जयपुर के ही एक लोकल स्टेशन पर रुकी जिसका नाम दुर्गापुरा था। वहाँ से एक लड़की चड़ी और मेरी नज़रे तो वहीं पर रुक गयी और वो एकदम हॉट, सेक्सी उसके बाल खुले हुए थे और दिखने में 22-23 साल की लग रही थी और उसने सफेद कलर का कुर्ता और भूरे कलर का लोवर पहना था। उसकी हाईट कुछ मेरे बराबर ही होगी। उसके बाल उसके चहरे पर आ रहे थे और वो अपना बेग उठाए मेरी तरफ आ रही थी। तभी मैंने अपना हाथ थोड़ा साईड में कर लिया और सोचने लगा कि काश ये लड़की मेरी ही सीट पर आए और हुआ भी वही और वो मेरे पास वाली सीट पर आई और उसने अपना समान रख दिया और बैठ गयी और हेडफोन लगा कर गाने सुनने लगी।

तभी मेरा लंड तो सातवें आसमान पर था.. लेकिन उसके फिगर का साईज़ तो में ठीक से नहीं बता सकता हूँ.. लेकिन उसके गोल गोल बड़े बड़े बूब्स जिसकी वजह से कुर्ता बहुत उठा हुआ सा थाज उसकी टांगे तो ऐसी थी मानो हाथ लगाया तो फिसल जाएगा। फिर में उसे घूर रहा था कि इतने में उसने मेरी तरफ देखा और मैंने नज़रे झुका ली। फिर मैंने सोचा कि बात करने की कोशिश करते है क्या पता लॉटरी लग जाए। तभी मैंने उससे पूछा कि आप कहाँ पर जावोगी? तो उसने कहा कि में बेंगलोर जा रही हूँ। ये सुनते ही मेरे मन में तो लड्डू फूटने लगे.. फिर हमने बात करना शुरू की और मुझे पता लगा कि उसका नाम यामिनी है और वो भी वहीं पर एक इंटरव्यू देने जा रही है जहाँ पर में जा रहा हूँ। फिर ठंड का मौसम था और रात की 9:00 बज चुकी थी। मेरी और उसकी बात बीच बीच में शुरू हो जाती.. फिर उसने एक कंबल निकाला और अपने पैरों पर डालकर बैठ गयी और नोवल पड़ने लगी। फिर में ये सोच चुका था कि चाहे कुछ भी हो इसको तो चोदना है और वैसे भी उसे भी मुझ में रूचि थी.. क्योंकि वो बार बार मुझे नज़रे उठा उठाकर देख रही थी और मैंने भी अपना कंबल निकाला और उसकी तरह बैठ गया और उसके कंबल में पैर डालने की कोशिश करने लगा क्योंकि हम आमने सामने बैठे थे। अपने कंबल की आड़ में मैंने अपना पैर उसके कंबल में डाल दिया ताकि किसी को कुछ पता ना लगे और जैसे ही मेरा पैर उसके पैर से छुआ तो उसने एकदम से मेरी तरफ देखा और दो सेकण्ड देखने के बाद वो फिर से नोवल पड़ने लगी.. ये मेरे लिए ग्रीन सिग्नल था। तभी मैंने अपना पैर उसके पैर से फिर छुआ और उसने भी अपने पैर मेरे पैर की तरफ बड़ा दिया।

फिर में अपने दोनों पैरो से उसके पैरों को रगड़ने लगा.. लेकिन उसके लोवर की वजह से ऊपर नहीं जा रहा था और फिर थोड़ी देर तक ये सब चलता रहा और वो अपने नोवल की तरफ देखकर मुस्कुराती रही। फिर अचानक वो उठने लगी मैंने अपना पैर अपने कंबल में ले लिया वो उठी और उसने अपना बेग निकाला और उसमे से कुछ लेकर टॉयलेट की तरफ चली गयी। फिर पांच मिनट बाद जब वो आई तो मुझसे मुस्कुराए बिना रहा नहीं गया। उसने अपने लोवर की जगह नीचे तक की एक स्कर्ट पहन ली थी.. मेडम उस दिन फुल मूड में थी। मुझे लगा कि आज रात कुछ तो होगा.. लेकिन मेरे पास कंडोम नहीं था तो मैंने फोन निकाला और अपने फ्रेंड को फोन किया जो कि कोटा में रहता था और गाड़ी 11.00 बजे कोटा पहुंचने वाली थी। मैंने उसे कंडोम लाने को कहा और उसने कहा कि वो टाईम पर पहुँच जाएगा। सामान लेकर उसके बाद हम वापस वैसे ही बैठ गये।

अब कुछ लोग सो चुके थे तो थोड़ा रिस्क काम था.. इसलिए मैंने इस बार बड़े आराम से उसके कंबल में अपना पैर डाल लिया और फिर से उसके पैरो को मसाज करने लगा। फिर में उसी सीट पर लेट गया जिससे मेरे पैर आगे तक पहुंच सके और फिर मैंने उसकी जांघो को सहलाना शुरू किया। क्या बताऊँ क्या जांघे थी उसकी.. बिल्कुल मक्खन। मेरा पैर तो बार बार फिसल रहा था। फिर मैंने अपना पैर उसके दोनों पैरों के बीच में फंसा दिया और उसने एकदम ज़ोर की साँस ली.. शायद मुझे लग रहा था कि उसने पेंटी भी नहीं पहनी थी तभी मेरा पैर उसकी नंगी चूत पर था जिस पर हल्के हल्के बाल थे। जिसका मुझे सिर्फ़ अहसास हो रहा था.. मुझे तो बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था कि में उसकी चूत को अपने पैर से सहलाने लगा। अब वो पागल होने लगी थी। उसने अपने हाथ से अपनी नोवल का पेज पूरा हाथ में लेकर फाड़ दिया शायद वो बहुत गरम हो चुकी थी और मैंने भी कोई कसर नहीं छोड़ी और अपने पैर का अंगूठा उसकी चूत में डालने की कोशिश करता रहा। तभी इतने में कोटा का स्टेशन आ गया। हम दोनों ने अपने आपको वहीं पर छोड़ दिया और में अपने फ्रेंड से मिलने नीचे उतर गया.. उसने मुझे कंडोम का एक पॅकेट और एक कोल्डड्रिंक की बॉटल दी और उसने कहा कि मैंने कोल्डड्रिंक में वोडका मिला दी है तू मस्त मजे करते हुए जा ट्रेन चलने वाली थी.. इसलिए मैंने उसे थेंक्स कहा और अपनी सीट पर आकर बैठ गया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

जब में अपनी सीट पर पहुंचा तो यामिनी ऊपर अपनी सीट पर जा चुकी थी। फिर में सोचने लगा कि अब क्या होगा? तभी उसने मुझसे कहा कि आप प्लीज़ पर्दा लगा देंगे में समझ गया कि ये लोगो को दिखाने के लिए ऊपर चड़ी है और अब ट्रेन चल चुकी थी और लगभग सभी लोग सो भी चुके थे। मैंने भी अपनी साइड सिट के पर्दे लगाए और अपनी सीट पर बैठ गया और सभी लोगो ने अपनी अपनी सीट्स के पर्दे लगा लिए थे.. इसलिए रिस्क बहुत कम था। फिर 2-3 मिनट बाद वो फिर से नीचे आकर बैठ गयी और उसके आते ही मैंने उसे किस कर लिया।

तभी वो बोली कि आराम से अभी बहुत टाईम है डियर। फिर मैंने उसे कोल्डड्रिंक ऑफर की तो उसने मना कर दिया.. फिर मैंने उसे जब बताया कि इसमे वोडका है उसने झट से बॉटल ले ली और 1/3 खाली करके मुझे दे दी। हम बहुत धीरे बातें कर रहे थे ताकि कोई सुन ना ले। फिर मैंने उस बॉटल को पूरा खत्म किया और उसे फिर से अपनी बाहों में ले लिया और दो मिनट बाद हम दोनों किस करने लगे लेकिन मेरा तो छोड़ो वो मेरे होंठो ऐसे चूस रही थी जैसे कोई लंड को भी नहीं चूसता। हमारा किस 5-6 मिनट तक चलता रहा। फिर में उसके बूब्स उसके कुर्ते के ऊपर से ही दबाने लगा। क्या बूब्स थे उसके जैसे वो मेरे हाथों के लिए ही बने हो.. ना ज़्यादा सॉफ्ट ना ज़्यादा टाईट.. बिल्कुल अच्छे गोल गोल बूब्स थे। तभी मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका कुर्ता उतार दिया उसने काले कलर की ब्रा पहनी थी मैंने उसकी ब्रा को भी उतार दिया और उसे वहीं पर लेटा दिया और खुद साईड में उसके ऊपर लेट गया।

हम दोनों नशे की वजह से भूल चुके थे कि हम ट्रेन में हैं। में उसके बूब्स को चूसने लगा.. उसके निप्पल उसके बूब्स पर बहुत अच्छे लग रहे थे। मैंने उसके निप्पल को मुहं में लिया और उसे भी चूसने लगा और अपने दूसरे हाथ से उसके दूसरे बूब्स को दबाने लगा यामिनी लंबी लंबी साँसे ले रही थी और कभी मेरे बालों को खींच रही थी और कभी मेरे सर को अपने बूब्स की तरफ दबा रही थी। तभी में भी पूरे जोश के साथ उसके बूब्स को चूस रहा था। ऐसा मज़ा पहले कभी किसी के बूब्स चूसने में नहीं आया जो आज आ रहा था। में अपने दांतों से उसके निप्पल को काट रहा था और दूसरे हाथ से उसके दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों में मसल रहा था। वो तेज तेज आवाज़ निकालने लगी आहह आअहह अह्ह्हहरे यार प्लीज़ धीरे करो.. प्लीज़ चूसो बस आाह्ह्ह्हह और कर प्लीज़। तभी मैंने एकदम उसके मुहं पर हाथ रख दिया। थोड़ी देर तक यही चलता रहा फिर वो मेरी टी-शर्ट को ऊपर करने लगी में समझ गया कि उसे क्या चाहिए और मैंने अपनी टी-शर्ट उतार दी और मैंने हम दोनों के ऊपर कंबल डाल लिया फिर वो मेरे ऊपर आकर मुझे किस करने लगी और फिर मेरी छाती को चाटने लगी। में तो पागल हो रहा था इतने में वो मेरे लोवर में हाथ डालने लगी और उसने उसे बिना उतारे हुए मेरे लंड को बाहर निकल लिया। फिर वो दो मिनट तक तो बस लंड को ही देखती रही और फिर धीरे धीरे करके उसे अपने मुहं में डालने लगी और थोड़ी देर में वो उसे आईस्क्रीम की तरह चूसने लगी.. मुझे लगा था कि इसे लंड ज़बरदस्ती चुसवाना पड़ेगा.. लेकिन वो तो बहुत तेज थी। मेरा लंड उसके मुहं में पूरा नहीं जा रहा था.. लेकिन वो लंड को पूरा पूरा लेने की पूरी कोशिश कर रही थी। फिर उसने बहुत देर तक मेरा लंड चूसा और जब में झड़ने वाला था तो उसने अपने मुहं में ही झड़ने को कहा.. प्यास में वो सब पी गयी जैसे जन्मो की प्यासी हो और उसके बाद मेरे बॉल्स को मुहं में लेकर चाटने लगी वो अपनी पूरी जीभ मेरी बॉल्स पर बड़े प्यार से फैरने लगी और उन्हें किस भी करने लगी।

में तो जैसे जन्नत में था और में जानता था कि इतना मज़ा मुझे फिर लाईफ में कभी नहीं मिलेगा.. इसलिए मैंने उस हर पल को एंजाय किया। उसने करीब आधे घंटे तक मेरे बॉल्स को चाटा और उसके बाद मैंने उसे लेटाया और उसके बचे हुए सारे कपड़े उतार दिए और साथ साथ अपने भी उतार दिए। वो तो जैसे हर चीज़ के लिए पहले से ही तैयार थी। अब वो सिर्फ़ पेंटी में थी और फिर धीरे से मैंने उसे भी उतार दिया.. क्या चूत थी उसकी? हल्के हल्के बाल थे उस पर.. ऐसा लग रहा था कि अभी कुछ दिन पहले ही साफ किए हो। तभी मैंने उसके लंड चूसने के तरीके से पता लगा लिया था कि ये तो पहले से ही कई लोगो से चुदी होगी.. लेकिन चूत देखने के बाद पता लगा कि में बिल्कुल गलत था और जब मैंने उससे पूछा तो उसने बताया कि वो वर्जिन है।

में बहुत उत्तेजित था की आज तो मुझे सील तोड़ने को मिलेगी और सबसे पहले में उसकी चूत से खेलने लगा। मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में ज़रा सी डालने की कोशिश की तो वो एकदम चीखने लगी तो मैंने उसके मुहं पर हाथ रख दिया। फिर में धीरे धीरे उसकी चूत को अपनी उंगली से खोलने लगा और फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। में अपनी जीभ उसकी चूत में डालने लगा और उसकी चूत को चूसने लगा। वो तो मुझे नोचने लगी और कहने लगी कि खा जाओ इसे.. पूरा खा जाओ छोड़ो मत साली बहुत परेशान करती है चूसो और ज़ोर से चूसो। में भी पूरे जोश में आ गया और ज़ोर से चूसने और उसकी चूत को काटने लगा। फिर थोड़ी देर बाद वो झड़ गई और में भी उसके पेट पर सर रखकर लेट गया और उसके फिर से गरम होने का इंतजार करने लगा।

फिर 10 मिनट तक हम वैसे ही लेटे रहे और फिर में उठा और उसे किस करने लगा। वो भी मुझे किस करने लगी फिर मैंने उसे कहा कि अब में तुम्हे चोदुंगा.. तुम्हे थोड़ा दर्द होगा लेकिन तुम चिल्लाना मत चाहे कुछ भी हो जाए.. तो उसने कहा कि आज तो चाहे जो भी हो जाए लेकिन में चुद कर ज़रूर रहूंगी। फिर मैंने उसे सीधा किया और और उसके पैरों को फैला कर अपने कंधो पर रख दिया.. मेरा लंड बिल्कुल सीधा खड़ा था और चूत में घुसने के लिए तड़प रहा था।

तभी मैंने कंडोम निकाला और उसे अपने लंड पर लगाने लगा.. इतने में यामिनी ने मुझे रोक लिया और कहा कि मैंने सुना है कंडोम से इतना मज़ा नहीं आता। तुम प्लीज़ बिना कंडोम लगाए ही चुदाई करो और उसने कहा कि उसने पहले कभी भी सेक्स नहीं किया और बात रही बच्चा होने की तो वो टेबलेट खा लेगी। फिर में मान गया और कंडोम को हटा दिया.. फिर मैंने अपने लंड पर थोड़ा तेल लगाया जो मेरे बेग में ही था और थोड़ा उसकी चूत पर भी लगाया.. फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धक्का मारने की कोशिश बार बार करने लगा.. लेकिन लंड हर बार थोड़ा सा जाकर फिसल कर बाहर आ जाता था। उसने अपनी आँखें बंद की हुई थी और हल्की हल्की आवाज़े आ रही थी। मैंने फिर से ट्राई किया.. इस बार मैंने लंड अपने हाथ से उसकी चूत पर लगाया और लंड को पकड़े रहा और एकदम बिना कोई इशारा दिए एक ज़ोर का झटका मार दिया और उसके मुहं पर अपना हाथ लगा दिया वो बहुत ज़ोर से चीखी.. चीख इतनी तेज थी कि उसे मेरा हाथ भी नहीं दबा पाया।

तभी मेरा आधे से ज़्यादा लंड अंदर जा चुका था। मैंने ज़्यादा देर ना करते हुए दूसरा धक्का मारा और अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। वो मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी। फिर मैंने उसे थोड़ी देर उसी पोज़िशन में रखते हुए उसे किस किया और 5-10 मिनट बाद वो थोड़ी ठीक होना शुरू हुई। मैंने भी फिर धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया। अब तो वो भी अपनी कमर उठा उठाकर लंड लेने लगी और मुझे अपनी और खींचकर मेरे चेहरे गले और होंठो पर किस करने लगी। वो इस तरह से उछल रही थी कि जिस तरह से कंगारू भागा करते है। फिर उसने मुझे नीचे लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को अपनी चूत में डाल कर घुड़सवारी करने लगी और चुदाई के पूरे मजे लेने लगी। फिर थोड़ी देर तक ये सब चलता रहा और फिर में उसकी चूत में ही झड़ गया। हम करीब 40 मिनट वैसे ही पड़े रहे और वो मेरे ऊपर थी और उसका एक बूब्स मेरे होंठो के ऊपर था।

फिर हम दोनों उठे और हमने अपने अपने कपड़े पहने और फिर उसने मुझे एक जोरदार किस किया और थेंक्स बोला और फिर हम दोनों सो अपनी अपनी जगह पर जाकर सो गये ।।

धन्यवाद …

Kamukta Meri Galti Se Meri Mummy Chud Gai

Meri Galti Se Meri Mummy Chud Gai
मेरी ग़लती से मेरी मम्मी चुद गई

प्रेषक : विक्की

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम विक्की है और आप सभी का कामुकता डॉट कॉम पर स्वागत है में इस साईट का बहुत बड़ा फैन हूँ और मुझे इस वेबसाइट पर कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। दोस्तों आज में आप लोगो को ऐसी स्टोरी बताने जा रहा हूँ जिसे पढ़कर आप लोग को ये पता चलेगा कि कैसे एक बेटे की गलतियों से उसकी मम्मी चुद गयी।

दोस्तों मेरे घर में में, मेरे पापा, मेरी मम्मी और मेरी एक दीदी है। मेरी दीदी का नाम प्रिया है और वो बेंगलोर के एक इंजिनियरिंग कॉलेज में पढ़ती है लेकिन पहले में आपको अपनी मम्मी के बारे में बता देता हूँ। मेरी मम्मी का नाम वर्षा है और वो दिखने में बहुत ही सुंदर है.. उनका फिगर बहुत ही हॉट और सेक्सी है.. उनकी गांड बिल्कुल गोल और बड़ी है। मम्मी घर में मेक्सी पहनती है और बाहर जाती है तो सलवार सूट या साड़ी पहनती है मेरी मम्मी सलवार सूट बहुत ही टाईट पहनती है फिर जब भी मम्मी बाहर जाती है तो सारे पड़ोस के अंकल उन्हें घूर घूर कर देखते रहते है और उनकी सलवार से उनकी पेंटी का आकार दिखता रहता है और कई बार मेरे मोहल्ले के सारे लड़के मेरी मम्मी के बारे में गंदी गंदी बातें भी करते रहते है।

मुझे अच्छी तरह से याद है एक बार में एक दुकान पर समान खरीदने गया हुआ था। वहाँ पर पास में कुछ लड़के थे जो सिगरेट पी रहे थे.. उन्ही में से एक का नाम असलम था.. उसने मेरी तरफ अपने दोस्तों को दिखा कर कहा कि पता है इसकी मम्मी बहुत गरम है.. इतनी टाईट सलवार पहनती है कि मन करता है उसकी सलवार यहीं पर फाड़ दूँ और उसकी गांड मारूं। में उस समय छोटा था तो मुझे इतनी बातें समझ में नहीं आती थी और मुझे उनसे बहुत डर भी लगता था कि कहीं वो लोग मुझे पीट ना दें। फिर एक दिन मैंने मम्मी को ये बात बताई तो मम्मी ने मुझसे कहा कि तुम उनकी बातें मत सुना करो.. वो लोग गंदे है मैंने कहा कि ठीक है। फिर मैंने कहा कि मम्मी वो लड़के हमेशा मुझे देखकर मुझसे कहते थे कि क्या घर पर तेरी मम्मी अकेली है और अगर में कहता हाँ अकेली है तो वो लोग मुझसे कहते थे कि ठीक है आज तेरी मम्मी को चोदने में जाता हूँ। फिर मुझे बहुत बुरा लगता था।

तभी एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि अगर तू मुझे अपनी मम्मी की चूत दिलवाएगा तो हम तुझे एक क्रिकेट बॉल खरीद कर देंगे। फिर मैंने कुछ नहीं कहा और में रोता हुआ घर पर चला आया तो मम्मी ने मुझसे पूछा कि क्या हुआ? मैंने कहा कि कुछ नहीं और में अपने कमरे में चला गया.. लेकिन मुझे उस समय तक इतना भी नहीं पता था कि चूत का मतलब क्या होता है? मुझे बस इतना समझ में आता था कि वो लोग मेरी मम्मी के बारे में बहुत गंदी गंदी बातें करते है और इस बात को करीब 6 महीने हो गये और ऐसा ही चलता रहा और वो लोग हमेशा मेरी मम्मी के बारे में गंदी गंदी बातें करते थे और में चुपचाप सुनता रहता था। फिर एक दिन की बात है हमारे सामने के फ्लेट में एक 30 साल का आदमी रहने आया.. उसका नाम राणा था वो बांग्लादेश से इंडिया बिजनेस के सिलसिले में आया था। मेरी उससे उस समय कोई जान पहचान नहीं थी। एक दिन एक लड़का मुझे मेरी मम्मी के बारे में छेड़ रहा था और मैंने उसे पलट कर गाली दे दी तो वो मुझे मारने लगा और कहने लगा कि साले तेरी मम्मी है ही रंडी इसलिए में तेरी मम्मी के बारे में गंदी बातें बोलता हूँ और मुझे मारने लगा।

फिर अचानक से वो आदमी जिसका नाम राणा था.. वो आया उसने उस लड़के को पहले रोका और बोला कि ये बच्चा है इसे क्यों मार रहे हो.. लेकिन जब उसने मुझे फिर से मारा तो राणा ने उस लड़के को मारा और वहाँ से भगा दिया और मुझे लेकर वो घर आ गया। वो पहले मुझे अपने घर ले गया और उसने मुझे बोला कि पहले अपना चहरा साफ कर लो फिर घर चले जाना और फिर मैंने ऐसा ही किया और में घर पर चला गया। वो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मैंने अभी तक मम्मी को ये बात नहीं बताई थी। फिर में अगले दिन उसके पास गया और मैंने उसे थेंक्स बोला और फिर धीरे धीरे हमारी बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी। फिर हम रोज़ मिलते थे और बातें करते थे एक दिन में और वो छत पर खड़े होकर बातें कर रहे थे कि नीचे मुझे मेरी मम्मी नज़र आई.. मैंने उसे दिखाया और कहा कि ये मेरी मम्मी है। मैंने देखा कि वो घूर घूर कर मेरी मम्मी के तरफ देख रहा था।

फिर में लगातार उसके घर आने जाने लगा तो वो मुझसे मेरी मम्मी के बारे में पूछता था.. जैसे क्या कर रही है? क्या पहना है? यही सब। एक दिन में उससे बातें कर रहा था तो उसने मुझसे पूछा कि अच्छा वो लड़के तुझे क्या बोलते थे? तभी मैंने सारी बातें उसे बताई.. फिर मैंने उससे पूछा कि चूत का मतलब क्या होता है? तभी वो हंसने लगा और बोला कि क्या तुझे नहीं पता? मैंने कहा कि नहीं पता है इसलिए ही तो पूछ रहा हूँ। तभी उसने कहा कि जिससे तू निकला है। फिर मैंने कहा कि क्या मतलब? तभी उसने कहा कि जहाँ से तेरी मम्मी सू सू करती है वही चूत है।

फिर एक दिन उसने मुझसे कहा कि विक्की क्या तू मुझे अपने घर नहीं बुलाएगा? मैंने कहा कि क्यों नहीं ज़रूर बुलाऊंगा.. अभी चलो.. मम्मी, पापा भी घर पर है और तुम मिल लेना मेरे मम्मी-पापा से। उसने कहा कि नहीं जब तेरी मम्मी घर पर नहीं हो तब बुलाना। मैंने कहा कि ठीक है। में उस समय समझ नहीं पा रहा था कि उसके मन में क्या चल रहा है अगले दिन मेरी मम्मी मंदिर गयी थी और मैंने उसे कॉल किया और बोला कि आ जावो। फिर वो मेरे घर पर आया हम बैठ कर बातें करने लगे उसने मुझसे पूछा कि विक्की में तुम्हे कैसा लगता हूँ? मैंने कहा कि आप बहुत अच्छे है। फिर उसने मुझसे कहा कि विक्की क्या तुम चाहते हो कि आज से वो लड़के तुम्हे नहीं चिड़ायें? मैंने कहा कि हाँ.. क्या ये हो सकता है? तभी उसने कहा कि हाँ.. क्यों नहीं हो सकता है? लेकिन तू मेरी कुछ बातें मान ले तभी ऐसा हो सकता है। फिर मैंने कहा कि हाँ बोलिए में आपकी हर बात मानूँगा। उसने कहा कि विक्की तू मुझे दिखा ना तेरी मम्मी कैसी पेंटी पहनती है। मुझे कुछ समझ में नहीं आया मैंने कहा क्यों आप ऐसा क्यों पूछ रहे हो? उन्होंने मुझसे कहा कि तू नहीं समझेगा तू अभी बच्चा है.. तू जाकर ले आ और हाँ अपनी मम्मी से कुछ मत कहना.. नहीं तो में तेरी मदद नहीं कर पाउँगा। मैंने कहा कि ठीक है और में गया और मम्मी जितनी पेंटी और ब्रा पहनती थी वो सब ले आया। उसमे से एक पेंटी ब्रा भीगी हुई थी जो आज ही मम्मी ने धोया था। मैंने देखा कि उसने वो पेंटी उठाई और उसे सूंघने लगा। मैंने उससे पूछा कि आप ये क्या कर रहे हो? तभी उसने कहा कि कुछ नहीं.. तुम गेम खेलो मैंने कहा कि ठीक है और में गेम खेलने लगा ऐसा कुछ दिन तक चलता रहा। में भी चुपचाप सब देखता था और वो मेरी मम्मी की पेंटी लगभग रोज़ सूंघता था।

फिर एक दिन जब मम्मी घर पर नहीं थी वो मेरे घर आया और हर दिन की तरह मेरी मम्मी की पेंटी को सूंघ रहा था। तभी थोड़ी देर बाद उसने मुझसे पूछा कि विक्की क्या मुझे अपनी मम्मी से नहीं मिलवाओगे? तभी मैंने कहा कि क्यों नहीं.. अपने ही मुझसे कहा था कि आप घर पर तब आओगे जब मम्मी नहीं रहेगी। फिर उसने कहा कि ठीक है अब में कहता हूँ कि तुम अपनी मम्मी से मेरा परिचय करवा दो। मैंने कहा कि ठीक है। फिर उस दिन जब मम्मी घर आई तो मैंने मम्मी से राणा का परिचय करवाया फिर हम लोग बैठ कर बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मम्मी ने कहा कि में चाय बनाती हूँ और मम्मी उठकर जाने लगी और वो मेरी मम्मी को घूरकर देख रहा था। मम्मी ने सफेद सलवार सूट पहन रखा था और मम्मी की काली कलर की ब्रा दिख रही थी और साईड से उनकी सलवार के अंदर से काली पेंटी भी दिख रही थी।

फिर मम्मी ने चाय लाकर हमारे सामने रखी। हम लोगों ने चाय पी और मैंने मम्मी से कहा कि में गेम खेलने जा रहा हूँ और में दूसरे रूम में जाकर गेम खेलने लगा और मम्मी और राणा बैठकर बातें करने लगे। कुछ देर बाद मुझे मम्मी की ज़ोर से हंसने की आवाज़ आई और इस तरह मम्मी की उससे दोस्ती हो गयी। दो महीने इसी तरह चलता रहा और फिर एक दिन पापा ऑफीस से आए उन्होंने मम्मी से कहा कि में 15 दिन के लिए बेंगलोर जा रहा हूँ मेरी एक जरूरी मीटिंग है और वो वहाँ पर दीदी से भी मिल लेंगे। मम्मी ने कहा कि ठीक है उन्होंने मम्मी से और मुझसे कहा कि तुम लोग भी चलो। मम्मी तो तैयार हो गयी लेकिन मैंने मम्मी से कहा कि मेरा स्कूल है.. में नहीं जा सकता हूँ और मैंने मम्मी से कहा कि में अंकल के यहाँ पर रह लूँगा.. आप लोग जाओ। लेकिन मम्मी को मुझे अकेले छोड़ने में डर लग रहा था और उन्होंने कहा कि आप जाईये.. में विक्की के साथ रहूंगी। शायद वो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी ग़लती हो गयी थी। फिर पापा अगले दिन बेंगलोर चले गये और अंकल का धीरे धीरे मेरे घर आना जाना बढ़ गया और वो मुझसे अब कम बातें करने लगे और मेरी मम्मी से ज्यादा। मेरे स्कूल जाने के बाद भी वो मेरी मम्मी से मिलने मेरे घर आने लगे और मुझे अपनी मम्मी में भी बहुत से बदलाव दिखने लगे.. पहले वो किसी और आदमी से बातें नहीं करती थी लेकिन अब वो उनके साथ घुल मिलकर बातें करने लगी.. लेकिन में इन सब बातों को अपने दिमाग से निकालता रहा.. क्योंकि मुझे ये नहीं पता था कि उसके मन में क्या है। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर एक दिन में नीचे से कुछ सामान खरीद रहा था कि वही लड़के जो मुझे परेशान किया करते थे.. उन्होंने मुझसे कहा कि यार हममे क्या कमी थी जो तेरी मम्मी राणा का बिस्तर गरम करने लगी है। फिर उन्होंने कहा कि चल तू एक काम कर.. अपनी मम्मी से कह कि जैसे उसका बिस्तर गरम करती है हमारा भी कर दे और बोलना हम उसे पैसे भी देंगे और मुझे बहुत गुस्सा आया। मैंने कहा कि तुम लोग झूठ बोल रहे हो.. मेरी मम्मी ऐसी नहीं है उन्होंने कहा कि अच्छा ठीक है तू जाकर पूछ ले राणा से। तभी में वहाँ से चला आया और फिर एक दिन में उससे बातें कर रहा था तो मैंने उनसे कहा कि वो लड़के ऐसा बोल रहे थे। वो मेरी तरफ देखने लगा और उसने कहा कि ये बिल्कुल सच है मैंने उससे कहा कि आप झूठ बोल रहे हो। तभी उसने कहा कि नहीं में बिल्कुल सच कह रहा हूँ मैंने कहा कि ठीक है में जब तक विश्वास नहीं करूँगा.. जब तक में खुद ना देख लूँ।

तभी उसने कहा कि ठीक है आज में फिर तेरी मम्मी को चोदूंगा और तू देख लेना। मैंने कहा कि ठीक है। फिर उसने मेरे सामने ही मेरी मम्मी को कॉल किया और पूछा कि भाभी कहाँ पर हो? मम्मी ने कहा कि में घर पर हूँ.. फिर उसने कहा कि आओ ना मेरे घर पर.. मेरा बहुत मन कर रहा है। मम्मी ने कहा कि विक्की नहीं है वो बाहर गया हुआ है कभी भी आ सकता है। उसने कहा कि वो अभी कहाँ आएगा.. वो बाहर गया होगा खेलने.. उसे थोड़ा टाईम लगेगा आ जाओ जल्दी से। मम्मी ने कहा कि ठीक है में आती हूँ। मुझे विश्वास नहीं हुआ उनकी बातें सुनकर कि मेरी मम्मी किसी और के साथ भी सेक्स कर सकती है। उसने मुझे मम्मी की नंगी फोटो भी दिखाई और पूछा कि अब तो तुझे विश्वास हुआ ना कि तेरी मम्मी मेरे सामने अपनी टाँगे फैला चुकी है।

तभी डोर बेल बजी.. उसने मुझे कहा कि तू दूसरे रूम में छुप जा। मैंने कहा कि ठीक है और में दूसरे रूम में चला गया.. मुझे बार बार यही मन में आ रहा था कि मेरी वजह से मेरी मम्मी चुद रही है। तभी मम्मी आई और मैंने देखा कि मम्मी ने एक लाल रंग का सलवार सूट पहन रखा है। मम्मी और राणा सोफे पर बैठकर बातें कर रहे थे। राणा का हाथ मेरी मम्मी की जांघो पर था और उन्हें सहला रहा था.. उसने मेरी मम्मी से कहा कि भाभी सच में तुम बहुत हॉट हो जब भी तुम्हे देखता हूँ मेरा मन करता है कि चोद दूँ। तभी मम्मी शरमा रही थी और अपने बालों को बार बार ठीक कर रही थी।

तभी थोड़ी देर बात करने के बाद मम्मी ने उससे कहा कि मुझे सू सू आई है और मम्मी बाथरूम में चली गयी और वो वहीं पर बैठा हुआ था। फिर मम्मी आई उसने कहा कि चलो रूम में चलते है। मम्मी ने कहा कि ठीक है और दोनों उठकर जाने लगे और अंकल का एक हाथ मेरी मम्मी के चूतड़ पर था। वहाँ पर जाकर वो दोनों लेट गये और वो मेरी मम्मी को किस करने लगे और मुझे बड़ा अजीब लग रहा था कि कोई और आदमी मेरी मम्मी को किस कर रहा है। तभी उसने मम्मी से कहा कि भाभी तेरा जिस्म बहुत गरम है लगता नहीं की तुम्हारी उम्र 39 की है.. ऐसा लगता है की तुम 26 की हो। अब वो मेरी मम्मी को किस करने लगा और मेरी मम्मी के बूब्स को दबाने लगा। मम्मी ने अपने घुटनों को फोल्ड कर लिया था और उनकी टाँगे फैली हुई थी। तभी मैंने गौर से देखा कि मम्मी की सलवार उनकी चूत के पास से गीली है और वो मेरी मम्मी की चूत को उनकी सलवार के ऊपर से सहला रहा है और मम्मी आआआआअ कर रही है।

फिर राणा ने अपने कपड़े उतार लिए और मुझे उसका लंड दिख रहा था.. बिल्कुल काला और मोटा था और मुरझाया हुआ था। तभी मम्मी ने उसे अपने हाथ में ले लिया और सहलाने लगी मम्मी की चूड़ियों की आवाज़ मेरे कानो में आ रही थी। मुझे बहुत अजीब सा लग रहा था और फिर थोड़ी देर तक मम्मी ने उसका लंड ऊपर से नीचे तक सहलाया और कुछ देर बाद उसका लंड खड़ा हो गया। वो बहुत ही बड़ा था। वो मम्मी के बूब्स को धीरे धीरे मसल रहा था.. अब वो आराम से बैठ गया और मम्मी ने उसका लंड अपने मुहं में ले लिया और उसे चूसने लगी.. वो बार बार आआआआअ कर रहा था। फिर उसने मेरी मम्मी का कुर्ता निकाल दिया। तभी मैंने देखा कि मम्मी ने सफेद कलर की ब्रा पहन रखी थी जिसमे लाल फूलल प्रिंट थे। फिर उसने मेरी मम्मी को अपने सीने से चिपका लिया और चूमने लगा। मम्मी उसकी जांघो पर बैठी हुई थी और वो मेरी मम्मी को जकड़ कर मेरी मम्मी के बूब्स ब्रा के ऊपर से चूम रहा था और कभी उनके होंठो को किस करता। फिर उसने मेरी मम्मी की ब्रा निकाल दी और बेड पर रख दी। अब मम्मी ऊपर से नंगी थी और मम्मी के नंगे बूब्स उसकी छाती से चिपके हुए थे। तभी थोड़ी देर बाद उसने मेरी मम्मी को लेटा दिया और मेरी मम्मी की सलवार को निकाल दिया। मम्मी ने जो पेंटी पहन रखी थी वो बहुत छोटी सी थी। उसने मेरी मम्मी के टॅंगो को फैला दिया और मम्मी की चूत के पास अपना मुहं ले गया। मम्मी की पेंटी थोड़ी गीली थी। तभी उसने पेंटी को सूंघा और बोला कि भाभी बिल्कुल नमकीन खुश्बू आ रही है मम्मी सिर्फ़ मुस्कुरा रही थी.. उसने पेंटी को थोड़ा चाटा।

फिर उसने मम्मी की पेंटी को साईड में कर दिया और मम्मी की चूत को देखने लगा और चूत पर थोड़े थोड़े झांट के बाल थे। उसने अपनी दो उंगलीयों से मम्मी की चूत को फैला दिया। मुझे बिल्कुल लाल चूत दिखने लगी और मम्मी सिसकियां लेने लगी। फिर उसने अपनी जीभ चूत पर लगाई और चाटने लगा। मम्मी आआहह करने लगी और अपने सर को इधर उधर करने लगी। मम्मी ने अपने हाथ पीछे की तरफ कर रखे थे। जिससे मम्मी के बूब्स और तन गये थे। मुझे अपनी ग़लती पर शरम आ रही थी कि आज मेरी ग़लतियों के कारण मेरी मम्मी इसके सामने टाँगे फैलाए हुये है।

अब उसने मेरी मम्मी की पेंटी निकाल दी और फिर से मम्मी की नंगी चूत को चाटने लगा। अब वो मम्मी के ऊपर लेट गया और मम्मी के होंठो को चूमने लगा और अपने एक हाथ से अपना लंड मेरी मम्मी की चूत पर रख दिया और धक्का दिया और मेरी मम्मी की चूत में अपना लंड घुसा दिया और धीरे धीरे चोदने लगा। उसका पूरा लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था और मम्मी औहह इउईई ओफफफफ्फ़ कर रही थी और वो धीरे धीरे अपनी स्पीड बड़ा कर मेरी मम्मी को चोद रहा था। मम्मी दर्द से सिसकियाँ ले रही थी.. वो मम्मी को चोदते हुए कह रहा था कि भाभी तू बहुत गरम है सारे मोहल्ले के लड़के तुझे अपने बिस्तर पर ले जाना चाहते है। तभी मम्मी ने कहा कि मुझे पता है फिर उसने कहा कि भाभी लेकिन में नहीं चाहता कि तू किसी और का बिस्तर गरम करे.. सिर्फ़ मुझसे चिपक कर रहो तो मम्मी ने कहा कि हाँ।

तभी उसने एक ज़ोर का झटका दिया और ज़ोर से मेरी मम्मी को चोदने लगा। मम्मी भी चूतड़ उठा उठाकर उसका साथ देने लगी। दोनों पसीने से लथ पत हो गये थे.. फिर भी वो जोर जोर से चोदे जा रहा था। फिर उसने एक ज़ोर का झटका दिया और मेरी मम्मी के ऊपर लेट गया। उसने अपना वीर्य मेरी मम्मी की चूत में ही डाल दिया और थोड़ी देर तक वो ऐसे ही मम्मी के ऊपर लेटा रहा। फिर थोड़ी देर बाद उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया और फिर 20 मिनट तक दोनों नंगे पड़े रहे और वो मेरी मम्मी के बूब्स को चूसता रहा। फिर मम्मी ने कहा कि अब में घर पर जा रही हूँ और वो खड़ी होकर जाने लगी और वो नंगा ही था। में जल्दी से दूसरे रूम में चला गया कि कहीं मम्मी ना देख ले।

कुछ देर तक में बहुत चकित रहा ये सब देखकर और में मम्मी के जाने का इंतज़ार कर रहा था.. लेकिन वो आई नहीं और में फिर से देखने गया तो देखा कि मम्मी खड़ी है और राणा बेड पर बैठा हुआ है और मम्मी की पीठ उसकी साईड में है और उसने मम्मी की कुरती उठा दी और वो मम्मी की गांड के आस पास सूंघ रहा था। फिर उसने अपना एक हाथ आगे की तरफ कर दिया और मम्मी को कसकर पकड़ लिया और मम्मी की गांड के छेद में नाक डाल दी और सूंघने लगा। तभी मम्मी बार बार अपना हाथ पीछे करके उसे हटाने लगी.. लेकिन वो लगातार सूंघता रहा। फिर उसने मम्मी की सलवार उनकी जांघ तक कर दी मम्मी की पेंटी उनकी गांड में घुसी हुई थी और वो फिर से नाक डाल कर सूंघने लगा और उसने जीभ से चाट चाट कर मम्मी की पेंटी गीली कर दी।

तभी उसने मम्मी की पेंटी को नीचे सरका दिया और मम्मी की गांड के छेद में अपनी जीभ डाल कर चाटने लगा। मम्मी आआआआ उईई माँ कर रही थी और अपनी गांड चटवा रही थी और मम्मी को बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने आज तक मेरी मम्मी को इस हालत में नहीं देखा था। मेरी आँखों के सामने एक आदमी मेरी मम्मी की गांड चाट रहा था। फिर वो मेरी मम्मी के पीछे आ गया और मम्मी झुक गयी मम्मी की सलवार उनके पैरो तक गिर गयी थी और उसने मेरी मम्मी की पेंटी को जांघो तक सरका दिया और पीछे से अपना लंड मेरी मम्मी की गांड में डाल दिया और मम्मी की गांड मारने लगा। तभी मम्मी आआआहह सस्स्सस्स औहह धीरे धीरे कर रही थी। मम्मी की सिसकियाँ मेरे कानो में अच्छे से सुनाई दे रही थी और वो मेरी मम्मी के चूतड़ सहलाता हुआ मेरी मम्मी की गांड मार रहा था।

तभी थोड़ी देर बाद वो ज़ोर से मेरी मम्मी की गांड मारने लगा। मम्मी दर्द से चिल्ला रही थी और मुझसे मम्मी की ये हालत देखी नहीं जा रही थी.. लेकिन में क्या करता। तभी थोड़ी देर बाद उसने मम्मी के दोनों बूब्स को पकड़ कर जोर जोर से धक्के देने शुरू कर दिये और उसने अपनी स्पीड बड़ा दी। फिर कुछ और धक्के देने के बाद उसने अपना वीर्य मम्मी की गांड के छेद में गिरा दिया और फिर मम्मी ने अपनी सलवार ऊपर चड़ा ली। तभी में वापस दूसरे रूम में चला गया और फिर कुछ देर बाद मम्मी बाहर बाहर आ गयी और वो भी साथ में था। में चुपके से थोड़ा बाहर आ कर देखने लगा।

तभी वो मम्मी को किस कर रहा था और कह रहा था कि भाभी आपके पति बेंगलोर गये है क्या आप इतने दिन रात भर मेरे साथ नहीं रह सकती है? तभी मम्मी ने कहा कि में देखूंगी.. लेकिन अगर मुझे मौका मिला तो पक्का आऊंगी और फिर वो चली गयी।

फिर वो आया और मुझसे बातें करने लगा। उसने मुझसे पूछा कि देखा तूने.. मैंने कहा कि हाँ। फिर उसने मुझसे कहा कि देख तेरी मम्मी जवान है और उनको इन सब चीज़ो की ज़रूरत है और में तेरी मम्मी की मदद कर रहा हूँ.. उसने कहा कि तुम ये बातें किसी से मत कहना। फिर मैंने उससे कहा कि ठीक है और मैंने किसी को ये बात नहीं बताई।

इस बात को दो साल हो गये है वो आज भी मेरी मम्मी को चोदता है। अब उसकी हिम्मत और बड़ गई है.. वो तो आजकल मौके की तलाश में रहता है और जब भी मौका मिला चुदाई शुरू। उसने कई बार मेरे घर पर भी आकर मेरी मम्मी को चोदा है और मैंने कई बार देखा है ।।

धन्यवाद …

Bhai Ke Dost Ne Sansar Savara

भाई के दोस्त ने संसार संवारा
Bhai Ke Dost Ne Sansar Savara Kamukta
<p>प्रेषक : सीमा</p>
<p>हैल्लो दोस्तों.. में अपनी कहानी आज आप लोगो के सामने पेश कर रही हूँ। दोस्तों मेरी दोस्त का नाम सीमा है और आप सभी को मेरी तरफ से नमस्ते.. दोस्तों आप सभी की ही तरह में भी कामुकता डॉट कॉम की बहुत बड़ी दीवानी हूँ और मुझे इस साईट पर कहानियाँ पड़ना बहुत अच्छा लगता है।</p>
<p>दोस्तों में सीमा मेरी उम्र 32 है और मेरा रंग गौरा है। मेरा फिगर 36-30-36 है ये कहानी मेरे और मेरे भाई के दोस्त बीच हुए सेक्स की है। वो भी दिखने में गौरा था और अच्छा खासा लंबा और मज़बूत जिस्म था उसका। मेरी शादी 7 साल पहले हो चुकी है लेकिन में अभी मेरे माता पिता के घर में हूँ बच्चा ना होने की वजह से मेरे पति और उसके घर वालो ने मुझे मेरे माता पिता के पास भेज दिया था। फिर रोज बच्चे की बात से मेरे ससुराल वाले मुझसे बहस करते और झगड़ा हो जाता था। लेकिन अब उन्हे क्या पता था कि हम दोनों के बीच कभी कुछ हुआ ही नहीं वो साला मादरचोद नामर्द इंसान जो मुझे कभी भी संतुष्ट नहीं कर पता था वो बच्चे कहाँ से पैदा कर पाता। लेकिन परिवार को अपनी चीज जैसी भी हो प्यारी लगती है.. लेकिन अब क्या उंगली करके बच्चे तो नहीं हो सकते थे। तभी उन लोगो ने मुझे यहाँ पर भेज दिया था और फिर में तभी से अपने मायके में हूँ।</p>
<p>फिर मेरा छोटा भाई जिसकी उम्र 30 साल की है और उसकी शादी हो चुकी है। उसकी बीवी उसके मायके गई हुई थी क्योंकि वो पेट से थी। फिर मेरे भाई का एक दोस्त अक्सर हमारे घर आता जाता था। वो मेरे बारे में सब कुछ जानता था और वो मुझसे हमेशा हंसी मजाक करता था। क्योंकि में हमेशा उदास रहती थी। वो क्या घर के सभी लोग मुझे खुश देखना चाहते थे.. लेकीन माँ बाप के घर रहना किसे अच्छा लगता है और वो भी शादी के बाद.. यही बात मुझे खाए जा रही थी। फिर एक दिन मेरे भाई के ससुराल से फ़ोन आया कि मेरी भाभी को अस्पताल में एडमिट किया गया है और डिलवरी कभी भी हो सकती है। तभी मेरा भाई जल्दी से अपने ससुराल चला गया क्योंकि भाभी ने उसे बुलाया था और दूसरे दिन उसने एक लड़के को जन्म दिया। तभी भाई का फोन आया तो घर के सभी सदस्य भी जाने को तैयार हो गये और वो मुझे भी ले जाना चाहते थे.. लेकिन मैंने मना कर दिया क्योंकि शायद इसके लिए में तैयार नहीं थी और मेरी माँ भी समझ गई थी.. लेकिन वो मुझे अकेले भी नहीं छोड़ना चाहती थी। तभी उतने में वीरेंद्र घर पर आया। मेरे भाई का दोस्त जिसकी उम्र 28 साल की है और उसकी अभी शादी नहीं हुई थी.. क्योंकि वो अपने काम के सिलसिले में बहुत व्यस्त रहता था और फिर उनके घर में वो अकेला कमाने वाला था। तभी माँ ने उससे कहा कि हम लोग बाहर जाने के लिए सोच रहे है.. लेकिन ये घर पर अकेली रहेगी। तभी वो बोला कि आप चिंता ना करे में रुक जाऊंगा सीमा के साथ। तभी घर वालो को इसमे कोई दिक्कत नहीं थी.. क्योंकि वो हमेशा से मेरे घर आता जाता था और सबको उस पर पूरा पूरा भरोसा भी था और फिर सभी घर वाले चले गए।</p>
<p>वो बारिश का समय था और फिर वो रात मेरे घर आकर रुकता और सुबह अपने काम से चला जाता था। फिर दो दिन बाद भाई का फोन आया कि हम यहाँ का प्रोग्राम खत्म करके 15 दिन में लौटेंगे। फिर मैंने कहा कि ठीक है और फिर शाम को वीरेंद्र आया तो मैंने उसे ये बात बता दी.. लेकिन वो अपने घर से टिफिन लाता था उसके और मेरे लिए तो हमने खाना खाया और तभी बिजली कड़कने लगी और ज़ोर से बारिश शुरू हो गई थी और मुझे बहुत डर लगता था.. में थी ही इतनी डरपोक। थोड़ी देर बाद हम टीवी देख रहे थे और रात के 10:30 बज चुके थे और अचानक लाईट भी चली गई और फिर जोर से बिजली कड़कने लगी और फिर में डर के मारे वीरेंद्र के सीने से लिपट गई.. अंधेरा हो चुका था और दरवाजा पहले से ही बंद था।</p>
<p>फिर में उससे ऐसे लिपट गयी कि हमारे शरीर से हवा भी पास नहीं हो सकती थी और मेरे बूब्स उसके सीने से दब रहे थे। फिर में हर बार बिजली की आवाज सुनकर उसे जोर से पकड़ लेती। तभी मेरी मजबूत पकड़ से मेरे बूब्स उसकी छाती पर और दब जाते.. ऐसा बार बार होने की वजह से वो भी अब गरम हो चुका था.. क्योंकि ठंडी हवा चल रही थी और उसमे मेरी गरम सांसे उसे मदहोश कर रही थी और वो मेरी पीठ पर हाथ घुमा रहा था और फिर में भी बेकाबू हो चुकी थी और शायद में बहुत दिनों से चुदी नहीं थी उसका भी असर था। फिर वो धीरे धीरे मेरी गर्दन तक पहुँच चुका था। वो अब मुझे आगे हाथ बड़ा कर मेरे बूब्स को छूने लगा और फिर धीरे धीरे मुझे सहलाने लगा।</p>
<p>तभी वो मुझे उठाकर मेरे रूम में ले गया और फिर उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया.. मेरे चहरे से गले तक और गले से पेट तक.. में बहुत गरम हो चुकी थी। इस तरह का मेरी जिंदगी में पहला एहसास था। फिर वो मुझे चूमे जा रहा था और एक एक करके कपड़े मेरे जिस्म से अलग अलग हो रहे थे। फिर सबसे पहले उसने मेरी साड़ी निकालकर अलग की और फिर वो मेरी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबा रहा था। फिर ऐसे ही अंधेरे में दस मिनट वो ब्लाउज के ऊपर से मेरी चूचियों को ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था और में सिसकियाँ ले रही थी। फिर उसने मेरे ब्लाउज के बटन खोल दिए और फिर उसने मेरे ब्लाउज को निकालकर दूर फेंक दिया। फिर वो अपने मुहं से ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियों को चूसने लगा। ठंडी हवा में उसके मुहं का गरम स्पर्श मदहोश कर देने वाला था और इस तरह का मज़ा शायद मेरे पति ने भी कभी नहीं दिया था। में आनन्द के सागर में जैसे गोते लगा रही थी और उस पल के मज़े ले रही थी। फिर शायद ही मुझे इतना मज़ा पहले कभी किसी मर्द से आया हो और फिर मेरी ब्रा भी मेरे जिस्म से अलग हो गई थी और अचानक लाईट आ गई और फिर मुझे होश आया तो मैंने उसे अपने से दूर कर दिया.. लेकिन अचानक से ज़ोर से बिजली कड़कड़ाई तो में फिर उसी अवस्था में उससे लिपट गई।</p>
<p>फिर उसने बटन बंद करके लाईट बंद कर दी और फिर मुझ पर आकर गिरा और मेरी चूचियों को जोर ज़ोर से भिचने लगा। मुझे इतना तेज दर्द हुआ कि मैंने उसे फिर अपने से अलग कर दिया। तभी उसने कहा कि क्या हुआ तो फिर मैंने कहा कि तुम तो दरिंदो की तरह करते हो और फिर में बेड के कोने पर सो गई.. में ऐसे ही सोई थी मैंने अपने कपड़े भी नहीं पहने थे.. पता नहीं क्यों? शायद में भी चुदना चाहती थी.. लेकिन वो बहुत ईमानदार था उसने बाद में मुझे छूने की कोशिश भी नहीं की और वो दूसरे कोने में पड़ा रहा.. लेकिन आज की रात शायद मेरी किस्मत में कुछ और ही लिखा था। अचानक बिजली कड़की और में उससे फिर चिपक गई.. लेकिन उसने तब भी मुझे नहीं छुआ। वो कहता था.. जब तक तुम नहीं कहोगी में आगे कुछ नहीं करूंगा।</p>
<p>फिर हम ऐसे ही पड़े थे और अचानक जोरो से बिजली कड़की और में उससे और नज़दीक हो गई और कहा कि तुम्हे जो करना है कर लो.. बस मुझे अकेले मत छोड़ना। फिर उसने कहा कि सोच लो.. फिर मत पछताना कि मैंने अगाह नहीं किया। फिर मैंने कहा कि ठीक है.. तभी वो ज़ोर ज़ोर से दोबारा मेरी निप्पल चूसने और काटने लगा दर्द तो हो रहा था.. लेकिन डर के मारे सब कुछ सहन कर रही थी और फिर कुछ ही पल में उसने मेरा पेटीकोट और पेंटी भी उतार दी और अपनी बड़ी ऊँगली मेरी चूत में डाल दी मुझे इतना दर्द हुआ कि मेरी चीख निकल गई। तभी वो ये देखकर दंग रह गया कि मेरी सील भी नहीं टूटी थी। तभी मैंने कहा कि साला हिजड़ा था.. नामर्द मेरी सील भी नहीं तोड़ पाया था और उस हरामी को बच्चा चाहिए था.. मुझे बांझ कहता था। तभी वीरेंद्र ने अपने कपड़े उतार कर पूरी तरह नंगा हो गया और मुझे घुटनो पर बैठाकर अपने लंड से मेरे मुहं को चोदने लगा। उसका लंड इतना बड़ा था कि मेरे मुहं में भी पूरा नहीं आ रहा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।</p>
<p>फिर थोड़ी देर मुहं चोदने के बाद उसने मुझे बेड पर सुला दिया और मेरी टांगो के बीच मेरी चूत के पास बैठ गया और एक जटके में अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया मेरी तो चीख निकल गई और उसका लंड मेरी चूत की सील तोड़ता हुआ अंदर चला गया मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी चूत में खंजर घोप दिया हो। एक पल के लिए ऐसा लग रहा था मानो मेरी जान ही निकल गई हो और फिर वो ज़ोर ज़ोर से अपना लंड डाल रहा था और फिर थोड़ी देर बाद जैसे में राहत की साँस लेती तो कमबख्त लंड मेरी चूत से बाहर निकालता और ज़ोर से ठोक देता और मेरी चीख निकल जाती थी और फिर वो इस तरह चार बार मुझे चोद चुका था और मेरा दर्द बड़ता ही जा रहा था। वो कहता था कि जब तक लड़कियों की चीख नहीं निकलती.. चोदने में मज़ा ही नहीं आता। फिर मैंने कहा कि तुम सच में बड़े जालिम हो ऐसे भला कोई करता है क्या? और वो भी अपने दोस्त की बहन के साथ। वो बोला लेकिन मज़ा तो आ रहा है ना मेरी जान। उसकी ये बात सही थी और आज पहली बार मुझे चुदने का एहसास हो रहा था। दर्द और मज़ा दोनों ही आ रहा था। आज की रात शायद ही कभी भूल सकूँ और फिर करीब दस मिनट चोदते चोदते वो झड़ने वाला था तो उसने पूछा कि कहाँ पर निकालू मेरी जान अंदर या बाहर? तभी मैंने कहा कि इतनी मेहनत करने के बाद बाहर निकालने से क्या फ़ायदा तुम अंदर ही छोड़ दो वो साला हिजड़ा तो वैसे भी कुछ नहीं कर सकता.. तुम ही मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो।</p>
<p>तभी उसने मेरी चूत में ही अपना सारा वीर्य निकाल दिया और में आज पहली बार संतुष्ट हुई थी और कितनी बार झड़ी थी ये में भी नहीं जानती और वो थकान की वजह से मुझ पर ही गिर पड़ा और हम थोड़ी देर पड़े रहे। फिर वो उठकर नंगा ही बाथरूम में चला गया और फ्रेश हो कर नंगा ही बाहर आ गया और फिर में भी उठकर बाथरूम गई और फ्रेश हो गई। मैंने देखा तो कपड़े सब बाहर ही थे तो में एक मेक्सी पहन कर बाहर आ गई। फिर उसने कहा कि ये क्या तुमने कपड़े क्यों पहने? तभी मैंने कहा कि अब क्या है? इतनी देर तो जालिम की तरह चोद चुके हो। फिर वो बोला कि अभी तो पूरी रात है अभी सेक्स का खेल खत्म कहाँ हुआ है।</p>
<p>फिर उसने दोबारा मुझे बेड पर खींचा तब मैंने मना किया तुम जालिम हो आराम से नहीं करते और बहुत दर्द देते हो। फिर वो बोला कि अब आप जैसा चाहोगी वैसा ही करूँगा.. फिर में बेड पर से उठी और वापस मेक्सी उतार कर बिल्कुल नंगी उसके पास में सो गयी और वो फिर से मुझे चूमने लगा चाटने लगा। उसने मेरे पूरे शरीर को ऊपर से नीचे तक चूमा और फिर वो मेरी चूत में उंगली करने लगा और मेरी चूत चोदने लगा। फिर वो धीरे धीरे करते हुए दो उंगलियां मेरी चूत में डालने लगा और मेरी चूत अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी जीभ के स्पर्श से में फिर गरम हो गई थी और वो मेरी चूत को चाटे जा रहा था जैसे कोई आईसक्रीम चाट रहा हो।</p>
<p>फिर उस दौरान में तीन बार झड़ चुकी थी और जितनी भी बार झड़ती वो मेरी चूत का पानी अपने मुहं में भरता और मेरी चूचियों पर छोड़ देता वैसे उसने मेरी दोनों चूचियाँ मेरी चूत के पानी से गीली कर दी और अपना लंड मेरे मुहं में दे दिया और चूसने को बोला.. वो जैसे जैसे बोलता में करती रही। फिर पहले कम से कम आधे घंटे वो नहीं झड़ा और जब झड़ने लगा तो मेरे मुहं से लंड निकालकर मेरे बूब्स के बीच में रख दिया और मेरे बूब्स को चोदने लगा। अपने लंड का पूरा पानी मेरी चूचियों पर गिरा दिया और मेरे सारे बूब्स पर मल दिया। मेरे बूब्स लाईट में उसके लंड के और मेरी चूत के पानी से चमक रहे थे और फिर उसने मेरी चूत को चाटकर चिकना किया और फिर से मुझे चोदने लगा। इस बार झड़ने की वजह से वो डेड़ घंटे तक मेरी चूत चोदता रहा। उस दौरान में दो बार झड़ चुकी थी। अब तो शायद में खुद नहीं जानती थी कि उस एक रात में कितनी बार झड़ चुकी थी.. लेकिन आज की रात जो चुदने का अनुभव हुआ था उससे मेरी जिंदगी बदल चुकी थी और आज में सही तरह से औरत बनी थी। फिर रात के 4:30 बजे हम दोनों नंगे ही एक दूसरो की बाहों में सो गये।</p>
<p>सुबह करीब 10 बजे भाई का फोन आया। फिर हम ऐसे ही बेड पर पड़े थे उसने सुबह उठते ही मुझे किस किया और मैंने भाई का फोन उठाया तो उसने कहा कि वहाँ पर उसके ससुराल में सब मेरे लिए पूछ रहे है तो में वहाँ पर आ जाऊँ.. क्योंकि मेरा पति भी वहां गया था। तभी मुझे विरेंद ने कहा कि तुम्हे जाना चाहिए.. शायद तुम्हारी सारी परेशानियां खत्म हो गई हो। फिर मैंने भाई से कहा कि हम शाम तक वहाँ पर पहुंच जाएँगे और फोन रख दिया। फिर उसने दोबारा मुझे चूमा और फिर कहने लगा कि अब तो इस ख़ुशी में जश्न होना चाहिए और तभी उसने मुझे पकड़ा और वहीं पर मुझे चोदने की तैयारी करने लगा और फिर में भी उसका साथ देने लगी। फिर उसने मेरे कपड़े उतार कर किचन से थोड़ा तेल लिया और मेरी गांड में लगाकर मेरी गांड मारने लगा। फिर करीब दस मिनट तक उसने मेरी ताबड़तोड़ चुदाई की। आज उसने मुझे चोद चोद कर पूरा सुख दिया और उसने मेरी गांड और चूत दोनों को फैला दिया जिसे कि अब तक मेरा पति नहीं चोद पाया था।</p>
<p>फिर करीब दस मिनट बाद वो मेरी गांड की हालत पूरी तरह से खराब करने के बाद मेरी गांड में ही झड़ गया और दोनों हाथों से मेरे बूब्स दबा रहा था और अपनी बाकि की कसर निकाल रहा था। फिर करीब बीस मिनट बाद चुदाई खत्म होने पर मुझे जब होश आया तो मैंने कहा कि अभी हटो मुझे नाश्ता बनाना है और जाने की तैयारी भी करनी है और फिर वो बोला कि अभी तो जो नाश्ता पड़ा है वो एक बार और कर लूँ.. फिर दूसरा नाश्ता करेंगे और वो फिर से मुझे दोबारा सुबह सुबह किचन में उसने मुझे अपनी बाँहों में पकड़ा और फिर मुझे वहीं पर पटक कर चोदने लगा और में उसके हर धक्के पर उसका शुक्रिया कर रही थी। मेरी चूत और मेरा पूरा जिस्म उसका साथ दे रहा था। फिर आधे घंटे बाद हम उठे और साथ ही बाथरूम चले गये.. फिर नहा धोकर फ्रेश होकर हम बाहर आए और अपने अपने कपड़े पहन कर तैयार होकर निकल पड़े। वीरेंद्र ने अपने बॉस को फोन करके दस दिन कि छुट्टियाँ ले ली और हम दोनों भाई के ससुराल चले गये जहाँ पर सब मुझे देखकर बहुत खुश हुए और रात की उस चुदाई के बाद में भी बहुत खुश थी और मेरे पति ने भी मुझसे माफी माँगी और घर चलने के लिए कहा। अब में भी खुश थी.. तो राज़ी हो गई और फिर वहां पर हम दस दिन रुके और उन दस दिनों में मैंने मौका देखकर अपनी चूत विरेन्द्र खूब चुदवाई। फिर में अपने पति के साथ ससुराल चली गई और तीन महीने बाद पता चला कि में प्रेग्नेंट हूँ। तभी सब लोग बहुत खुश हुए.. में भी खुश थी लेकिन मेरे पति को ये पता था कि वो उसका बच्चा नहीं है लेकिन उसने इस बात को किसी से नहीं कहा और ना ही मुझसे कुछ पूछा.. क्योंकि वो भी जानते थे कि घर वाले सब इस बात से खुश थे और फिर वीरेंद्र का फोन आया तो उसने मुझे बहुत बधाईयाँ दी और मैंने भी उसका धन्यवाद किया। आख़िर वो ही पहला इंसान था जिसने मुझे पहले औरत और फिर माँ बनाया था और मेरा संसार सवांरा था। उसका ये एहसान में कभी नहीं उतार सकती थी और मेरे पति को अभी तक इस बारे में नहीं पता था कि वो इंसान कौन है? तो दोस्तों ये था मेरी ज़िंदगी का सच जो मैंने आप लोगो से शेयर किया ।।</p>
<p>धन्यवाद &#8230;</p>